उस नाजूकसी नजाकतने…

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उस नाजूकसी नजाकतने न जाने कितनो को घायल किया,
जैसे सवारी उन्होने जुल्फे अपनी, हमने खुदही को भुला दिया।
उनकी इक नजर मे, हमारे तो होश उड़ जाते थे,
पता नही उनके घर के आयने हररोज़ बिखर कर केसे जुड़ जाते थे ।

सवारना तो हम भी चाहते थे अपने दिल को,
समझाना तो हम भी चाहते थे अपने दिल को,
पर क्या करे, उन आँखों की मस्ती ने हमको रोक दिया,
इक झपक मे हीे, अपना दिल हमने उनके प्यार मे झोक दिया ।

जलन होती थी हमे उनसे, जिनके साथ वो हसती खेलती थी,
और हम तो उनकी इक नजर के लिए तरस जाते थे,
पर क्या करे, उन लोगों को उन लम्हो की कदर नही थी,
और हम उनके खयालो मे पूरी ज़िन्दगी जी जाते थे ।

उनकी जिंदादिली देख कर हम जमाने की बुजदिली भुल गए,
और उनसे हुई थोडीसी गुफ्तगू हमारी, हमारे तो किस्मत के दरवाजे खुल गए ।
उनकी इक मुस्कुराहट देख कर ही, हमारा मन भर जाता था,
क्योंकि कुछ देर के लिए ही सही, पर दिनमे चाँद जमींपर दस्तक लगाने आता था ।

बहुत शर्मीले है हम, उनके खयालो मे ही ख्वाब बुनते बेठे,
हमसे दिल का हाल बताने मे थोड़ी देर क्या हुई, वो किसी और को अपना दिल थमा बेठे।
उन्हें समजना चाहते थे हम, पर वो अपने ही दुनिया मे मस्त हो रहे थे,
और हम जो हमारा कभी ना था, वो ना मिलने के गम मे शिकवा कर रहे थे ।


(Image Courtesy of Ambro at freedigitalphotos.net)

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