आपके सादगी के चर्चे..

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Image by Raheel Shakeel from Pixabay

आपके सादगी के चर्चे करना,
जैसे कोई हैसियत से बड़ा कदम उठाना,
बस चिंता यही है की,
दबे जज़्बात कही बोझ ना बन जाए..

आपका यू हक जताना,
जैसे दिलका साँसोंपे हक बताना,
बस आफत यही है की,
आप बेगाना कर दे तो हमारा वजूद ना मिट जाए..

आपका यू हलकेसे मुस्कुराना,
जैसे कोई कयामत की अदा बिखेरना,
बस दुआ यही है की,
इसकी रूहानियत में हम सदा डूबे ना रह जाए..

आपका यू नजरे मिलाना,
जैसे कोई ठंडी हवा का झोंका छू जाना,
बस डर यही है की,
उनमें खोकर हम कही खुदसे पराए ना हो जाए..

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खुश है तू..

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खुश है तू,
तेरे आँखों की चमक कह रही,
तेरे हसी की बहार कह रही,
तेरे बातों का अंदाज कह रहा,
तेरे चेहरे का नूर कह रहा,

खुश है तू,
ये रंगीन समा कह रहा,
ये हसीन ऋत कह रही,
ये गुलशन माहोल कह रहा,
ये मासूम शाम कह रही,

खुश है तू,
यकीन नही होता,
चल खुले आसमान में,
चाँद को बुलाते है फलक पे,
मुझे यकीन है,
वो यही गवाही देगा,

खुश है तू,
फिर भी यकीन नही होता,
तो जरा मुस्कुराकर देख,
सितारे झिलमिला उठेंगे,
चराग जगमगा उठेंगे,
हवाएं महक उठेगी,
और इस कायनात का जर्रा जर्रा,
यही दोहराएगा..
खुश है तू,
खुश है तू,
बस खुश है तू..