बस छीन ना लेना हमसे हक़….

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होश हमारे उड़ाकर, क्यों मदहोश हे हम, पूछ रहे हो आप,
घने अँधेरे में खूबसूरतकी नुमाइश करने वाले, उस चाँद से भी खूबसूरत हो आप।

धुंधले लगने लगे हे मंजर, जिसे हम खूबसूरत कहा करते थे,
धोका दे रही थी हमारी नजर हमे, जिन पर हम नाज किया करते थे।

नजरोसे भी भूल हो जाती हे कई बार, खूबसूरती को परखनेमे,
और अल्फाज भी कम पड जाते हे, किसीकी तारीफ़ करनेकी आजमाइशमे।

अंजाम भुगतने के लिए तैयार हे हम, खूबसूरतीकी परिभाषा करने में जल्दबाज़ी करनेका,
बस छीन ना लेना हमसे हक़…. आपके इश्क में फना हो जानेका।


(Image courtesy of winnond at FreeDigitalPhotos.net)

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