बड़े अरसे के बाद मिले वो

वो हमे बड़े अरसे के बाद मिले। एक दूसरे के सामने आते ही कुछ देर के लिए ना वो कुछ बोल पाए, ना हम।

हमारे बीचकी उस खामोशीको खत्म करते हुए हमने कहा –

इतनी सारी है बातें, कितने सारे है किस्से, कहासे शुरु करे कहा खत्म करे, समझ नही आता,
बिताए है इतने सारे हसीन लम्हें आपके साथ, कोनसे दोहराए कोनसे छोड़ दे, समझ नही आता।

तो उन्होंने कहा –

कुछ ना कहिए, कुछ ना दोहराइए, बस चुप बैठे रहिए।

तो हमने जवाब दिया –

किसीको चुप करानेसे या चुप बैठेनेसे, आँखोंमे आनेवाले आँसुओ को रोका नही जाता,
साथ बिताए हुए लम्होंको नजरअंदाज करके… यादोंको मिटाया नही जाता।

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उस मुस्कुराहट के पीछे

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जुदाई का ये आलम हमसे,
न जाने क्या क्या करवाएगा,
जब भी याद आएगी उनकी,
न जाने कितने आंसू रुलाएगा,

साथ बिताया हुआ हर लम्हा,
लबों पे मुस्कुराहट तो ले आएगा,
मगर उस मुस्कुराहट के पीछे,
न जाने कितने गम छुपाएगा।

फसा देगी ये आँखे

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ये आँखे, फसा देगी ये आँखे एक दिन,
जुबाँ पलट जाए, पर ये अपनी जिद नहीं छोड़ती,
नियत बता देती है, सच बया कर देती है,
और अनजाने में इकरार भी कर देती है।

हमारी तकरार पे आँखे मासूमियत से बोली,
आदत है मुझे ताने सुनने की,
क्या करे, यहाँ लोगो के दिल बहक जाते है ,
और कसूर नजर को दिया जाता है।

She Gets Into My Head

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She gets into my head.
Whatever she does,
Whatever she feels,
Whatever she says,
Whatever her reactions are,
Whatever she is.

She gets into my head.
When she’s around,
I get distracted.
My attention is toward her.
I may do something else,
But think only about her.

She gets into my head.
Every small detail of her,
Significant or insignificant,
Likes and dislikes,
Everything matters to me,
I admire everything.

She gets into my head.
Even when she’s not around,
I recall our interactions,
Funny, deep, and emotional ones.
And feel good about it.
Like finding a reason to be distracted.

The crazy fact,
She gets into my head.
And she is travelling from there,
Through the road of feelings.
And I never knew,
When she got into my heart.

इन आँखोकी इनायत देखकर

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हररोज़ तो देखते थे हम एकदुसरेको,
फिर हम मुस्कुराकर देखते थे तो क्यों मुकर जाते थे,
गुफ्तगू करनेका प्रयास जबभी हम करते थे,
तो उन आँखोसे अजनबी होनेका पैगाम क्यों दे जाते थे।

तुम्हे क्या पता कितनी हिम्मत जुटाकर,
अपना मन बनाकर आपसे गुफ्तगू करने आये थे,
कितनी सारी बाते ज़ेहनमें रखकर,
धड़कते हुए दिलके साथ तुम्हारे पास आये थे।

नाम न था पता आपका, बस आँखोसे रूबरू थे,
फिरभी आपने निगाहे मिलातेही हमे पहचाना तक नहीं ,
ठुकरा दिया इस कदर की हैरान रह गए थे,
हमारी मासूम बातोंमे छुपी सच्चाईको समझा तक नहीं।

हिम्मत जुटानेवालोको ऐसे ठुकराता हे क्या कोई,
दिल्लगी करनेका ऐसा सिला देता हे क्या कोई,
वो तो आपकी आँखोमे सारा जहा दिख गया वरना,
ऐसे ठोकर खानेके बाद संभालता हे क्या कोई।

जमानेमें तो बदनाम हो ही गए है मदहोशीके लिए,
होशमें भला कैसे रह सकता है कोई उन आँखोमें झाककर,
अफ़सोस नहीं हे हमे हमारे मदहोश रेहनेके लिए,
ये बेखबर जमानाभी बहक जायेगा इन आँखोकी इनायत देखकर।

दुनिया बदलनेवालोकी हिम्मत

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दिलकी बाते जानकर, पीठ थपथपाकर,
हौसला बढ़ानेकी शायद ही किसीकी कोशिश होती हैं,
ढ़लतेे सूरजको देखकर मुँह फेरने वाली इस दुनियाको,
उसकी तड़पन कहा पता होती हैं।

हर मुश्किलका सामना करनेके लिए,
जज़्बा अटूट हो जाता हैं जब नियत साफ होती हैं,
आधी-अधूरी बात जानके नजरिया बदलतीे इस दुनियाको,
दुनिया बदलनेवालोकी हिम्मत कहा बर्दाश होती हैं।

Choose To Be A Human

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Sometimes I forget to be natural.
I try to act perfect.
I forget I can become vulnerable too.
I just have to accept what I feel.

Just be who I am.
Just throw away the mask.
Just turn on the true face.
I should not pretend I am fine.

If I’m sad, I don’t have to,
again, pretend I’m good.
If I’m happy, I don’t have to,
wonder how I can be happy?

Is there something wrong?
Is there something I missed?
No, no, no.
I don’t have to pretend to be normal.

I forget I have feelings,
It doesn’t demand perfection.
It’s natural to be imperfect.
It’s natural to be a human.

It will take time to pull myself together,
But denial to accept my vulnerabilities,
It will work against me.
People around me notice that.

But I notice that after it happened.
Then I realize I don’t have to do that.
I must accept my feelings,
Even though they make me vulnerable.

The crazy fact is,
Imperfections make us humans,
Trying to be perfect only make us robots,
We must choose to be a human.

A GUEST POST “I’ve Always Told You” by Me on POETRY PASSION

First guest blogging experience.

Thank you Aatif Sir for publishing my poetry on your blog.

Source: A GUEST POST “I’ve Always Told You” by “PRATIK KIRVE FROM PUNE

I Don’t Want To Leave This Place

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Why do we have to?
Move ahead in life,
Chase the unknown horizon,
Strode on mysterious paths.

Even if we don’t want to,
Even if we want to stay,
Right where we are,
And do what we are doing.

The destiny organizes circumstances,
In such a way that,
We have to leave the place,
And embark upon a quest.

Unknown places,
Unknown conditions,
Unknown people,
And unknown journey.

But what we know certainly is,
There is no going back.
Once we leave, we leave.
Then what do we do?

We miss that beautiful place,
Recall all the memories,
Maybe cry a little,
And let our emotions flow.

I wonder if the destiny,
Realigns the circumstances,
Get us back to the place,
We had no intention to leave.

The same place,
The same conditions,
And the same people,
Everything will be the same.

Same joy,
Same emotions,
And same vibes.
Everything same as before.

The crazy fact is,
I know this will never happen,
But I wish it would,
I just wish.

बिछड़ गए हम आपसे जिस लम्हे में

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बिछड़ गए हम आपसे जिस लम्हे में, उस लम्हेने सारा सुकून छीन लिया,
चैन खो गया दिलका जैसे, डोर से टूटकर पतंगने अपना वजूद खो दिया,

इरादे सहम गए ज़िंदा रहनेके जैसे गर्दिशने तारोको गुम कर दिया,
खो गई हस्ती आपके बिना हमारी और परछाईओने भी पेहचाननेंसे इन्कार कर दिया,

आसमानोंकी अर्ज़ियां सुनकर लम्हे थम जाते है क्या कभी?
ज़ुन्झ ज़ुन्झ कर अपने आपसे, कोई सुलझता है क्या कभी?

खुदगर्ज़ है ये ज़िन्दगी, कभी कभार कैसे सितम ढाती है?
सितारोंको छूनेकी बात करने वालोको, हमेशा ज़मीनही क्यों नसीब हो जाती है?

दिन और रात गुजर जाते है रोज़, बिखरे हुए दिलके टुकड़े इकट्ठा करनेमें,
फिर मिलने की आसने ज़िंदा रखा है, वरना कितना वक्त लगता है अपने आपको मिटानेमें।


Wish You All A Very Happy World Poetry Day..!! 😀 😀